“अभी झरत बिगसत कंवल” ओशो की वह ध्यानात्मक और जीवन–दर्शन से भरपूर कृति है, जिसमें वे कमल के खिलने और झरने को मानव चेतना और जीवन के सतत परिवर्तन का प्रतीक मानकर समझाते हैं। इस पुस्तक में ओशो बताते हैं कि जीवन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि क्षण–क्षण बदलती अनुभूतियों का सतत प्रवाह है—जहाँ आनंद, पीड़ा, प्रेम और अकेलापन सभी सजगता के द्वार बन सकते हैं।
यह कृति साधक को सिखाती है कि जीवन को स्थिरता या पकड़ से नहीं, बल्कि स्वीकृति, मौन और साक्षीभाव से समझा जाता है। जब हम परिवर्तन का विरोध छोड़ देते हैं, तो हर अनुभव ध्यान का सौम्य स्पर्श बन जाता है—चाहे कमल खिले या झरे, हर अवस्था में सत्य का सौंदर्य प्रकट होता है।
“अभी झरत बिगसत कंवल” पाठक को आमंत्रित करती है कि वह जीवन को चाहत, भय और अपेक्षाओं के दबाव से नहीं, बल्कि जागरूकता और सहजता के साथ जीना सीखे। यह पुस्तक उन साधकों के लिए मार्गदर्शक है जो आध्यात्मिकता को भागना नहीं, क्षण–क्षण अनुभव करके जागना समझते हैं।
Publisher: A REBEL BOOK
Language : HINDI
Binding: HARD COVER
Pages : 376

