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अज्ञातवास का हमसफ़र” एक ऐसी विचारपूर्ण और गहन साहित्यिक कृति है जो मानव मन के संघर्षों, आत्मिक खोज और समाज की अनकही सच्चाइयों को बेहद प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है। डॉ. राजेन्द्र मोहन भटनागर अपनी विशिष्ट शैली में जीवन की अनिश्चितताओं, परिस्थितियों के दबाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और मनुष्यता की मूल चेतना को उजागर करते हैं। पुस्तक न केवल व्यक्ति की मानसिक यात्रा को दर्शाती है, बल्कि यह बताती है कि अज्ञातवास—चाहे वह बाहरी हो या भीतर का—कैसे इंसान को मजबूत, संवेदनशील और परिपक्व बनाता है। गहरे चरित्र-चित्रण, मनोवैज्ञानिक यथार्थ, सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा और सामाजिक सरोकारों के साथ यह रचना पाठकों को अंत तक बांधे रखने की क्षमता रखती है। आधुनिक पाठक, चिंतक और साहित्य प्रेमी सभी इस पुस्तक में अपने अनुभवों की प्रतिछाया देख सकते हैं।

PUBLISHER: HINDI POCKET BOOKS

BINDING: PAPER BACK

LANGUAGE: HINDI

PAGES: 328