चित्रलेखा – भगवतीचरण वर्मा हिंदी साहित्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध और दार्शनिक उपन्यास है, जो पाप और पुण्य, वासना और वैराग्य, तथा नैतिकता और मानव-स्वभाव जैसे जटिल विषयों की गहन पड़ताल करता है। यह उपन्यास जीवन के मूल प्रश्नों — पाप क्या है? पुण्य क्या है? — पर आधारित एक विचारोत्तेजक कथा प्रस्तुत करता है।
कहानी में मुख्य पात्रों के माध्यम से लेखक ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि मनुष्य अपने स्वभाव और परिस्थितियों से संचालित होता है, न कि केवल नैतिक मानदंडों से। चित्रलेखा का चरित्र स्त्री-स्वतंत्रता, आकर्षण और जीवन की जटिलताओं का प्रतीक बनकर उभरता है।
सरल, प्रभावशाली और दार्शनिक शैली में लिखा गया यह उपन्यास हिंदी साहित्य के पाठकों, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Publisher: RAJKAMAL PRAKSHAN
Language : HINDI
Binding: PAPER BACK
Pages: 199

