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गुनाहों का देवता” धर्मवीर भारती का अमर प्रेम–उपन्यास है, जो प्रेम, संवेदना, त्याग, मौन पीड़ा और अधूरी चाहतों की एक अविस्मरणीय कहानी प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक चंदर और सुधा के उस अनकहे प्रेम की गाथा है, जो परिस्थितियों, सामाजिक मर्यादाओं और भावनात्मक उलझनों के बीच कहीं खो तो जाता है, लेकिन पाठक के दिल में हमेशा के लिए बस जाता है।
भावनाओं की गहराई, मनोवैज्ञानिक चित्रण, मानव रिश्तों की जटिलता, और प्रेम के शुद्धतम रूप को जिस खूबसूरती से धर्मवीर भारती ने उकेरा है—वह हिंदी साहित्य में दुर्लभ है। कहानी आपको रोमांचित भी करती है, रुलाती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है कि क्या प्रेम सिर्फ पाने का नाम है या समझने और निभाने का भी?
यह उपन्यास प्रेम साहित्य, क्लासिक कथाओं और मन के भीतर चलने वाले संघर्षों को समझने वाले हर पाठक के लिए एक आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव बन जाता है।

PUBLISHER: BHARTIYA GYANPITH

BINDING: PAPER BACK

LANGUAGE: HINDI

PAGES: 257