"साम्राज्यवाद : पूंजीवाद की चरम अवस्था" व्लादिमीर इलिच लेनिन की एक
क्रांतिकारी रचना है जिसने विश्व अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज की दिशा बदल दी। इस पुस्तक में लेनिन ने
विस्तार से बताया है कि पूंजीवाद कैसे अपने विकास की अंतिम अवस्था में साम्राज्यवाद में परिवर्तित होता है —
जहाँ बड़े पूंजीपति और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ पूरी दुनिया की संपत्तियों और श्रम पर नियंत्रण करने लगती हैं।
यह पुस्तक
मार्क्सवादी अर्थशास्त्र, वर्ग-संघर्ष, उपनिवेशवाद, वित्तीय पूंजी, और वैश्विक शोषण की गहराइयों को
उजागर करती है। आधुनिक समय में जब आर्थिक असमानता और कॉर्पोरेट प्रभुत्व फिर से बढ़ रहे हैं, लेनिन की यह रचना पहले से
कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
PUBLISHER: PRAGATI PRAKSHAN PROGRESS PUBLISHERS MOSCOW
BINDING: PAPER BACK
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 176

