“महावीर : मेरी दृष्टि में” ओशो द्वारा भगवान महावीर के जीवन, संदेश और मौन की शक्ति पर आधारित अत्यंत गहन और स्पष्टदर्शी प्रवचनों का संग्रह है। इस पुस्तक में ओशो महावीर को केवल जैन धर्म के आचार्य के रूप में नहीं, बल्कि पूर्ण जागरण, अहिंसा और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे बताते हैं कि महावीर का संदेश समय और परंपराओं से बंधा नहीं, बल्कि मानव चेतना की शाश्वत पुकार है—भीतर उतरने, स्वयं को देखने और सत्य को अनुभव करने की।
ओशो महावीर की तपस्या, मौन और निर्भीकता को आधुनिक मनुष्य के संदर्भ में समझाते हैं—जहाँ संघर्ष केवल बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि भीतर के भय, इच्छाओं और भ्रमों से होता है। इस कृति में वे यह स्पष्ट करते हैं कि महावीर का धर्म बंधन नहीं, मुक्ति की राह है; उपदेश नहीं, अनुभव का आमंत्रण है।
जो पाठक आत्म-अनुशासन, मौन और साक्षीभाव के वास्तविक अर्थ को समझना चाहते हैं—उनके लिए यह पुस्तक भीतर की निस्तब्धता और आत्मिक शक्ति की खोज का सीधा मार्ग है।
Publisher: A REBEL BOOK
Language : HINDI
Binding: HARD COVER
Pages : 570

