“मुंशी प्रेमचंद की चिट्ठी-पत्री” हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष मुंशी प्रेमचंद के निजी पत्रों का महत्त्वपूर्ण संकलन है, जिसे प्रख्यात साहित्य-शोधकर्ता मदन गोपाल ने संपादित किया है। यह पुस्तक केवल पत्रों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रेमचंद के व्यक्तित्व, विचारों, संघर्षों और उनके समय की सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों की जीवंत झलक है।
इन पत्रों में प्रेमचंद का लेखक-मन, आर्थिक संघर्ष, प्रकाशन संबंधी चिंताएँ, पारिवारिक संवाद, राष्ट्र और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यहाँ हमें एक महान कथाकार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान का सजीव रूप मिलता है—जो साहित्य को समाज-परिवर्तन का माध्यम मानता था।
मदन गोपाल की संपादकीय टिप्पणियाँ और संदर्भ पाठक को उस दौर की पृष्ठभूमि समझने में सहायता देती हैं। यह कृति शोधार्थियों, साहित्य-प्रेमियों और प्रेमचंद के पाठकों के लिए अमूल्य दस्तावेज़ है।
“मुंशी प्रेमचंद की चिट्ठी-पत्री” पढ़ते हुए लगता है मानो हम सीधे प्रेमचंद से संवाद कर रहे हों—उनकी चिंताओं, आशाओं और साहित्यिक दृष्टि को करीब से समझते हुए।
Publisher: SAHITYA BHANDAR
Language : Hindi
Binding: PAPER BACK
Pages : 204

