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“अनहद में विश्राम” Osho की एक गहन, ध्यानात्मक और अनुभूति–प्रधान कृति है, जो साधक को शब्दों, विचारों और बाहरी शोर से परे अनहद नाद—अर्थात् भीतर के मौन संगीत—में ठहरने का आमंत्रण देती है। ओशो बताते हैं कि जब मन शांत होता है, तब जो नाद स्वयं से उठता है, वही सत्य का द्वार है; वहीं विश्राम है, वहीं मुक्ति है।
यह पुस्तक ध्यान को किसी तकनीक तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे जीवन की स्वाभाविक अवस्था के रूप में समझाती है—जहाँ साक्षीभाव, स्वीकार और प्रेम स्वतः घटित होते हैं। काव्यात्मक भाषा, सूक्ष्म प्रतीक और सीधी अंतर्दृष्टि के साथ ओशो पाठक को भीतर उतरने, अहंकार से मुक्त होने और वर्तमान क्षण में टिकने की कला सिखाते हैं।
जो पाठक मानसिक थकान, बेचैनी और निरंतर खोज से विराम चाहते हैं—उनके लिए यह कृति भीतर के विश्राम की सीधी राह खोलती है। “अनहद में विश्राम” पढ़ी नहीं जाती, अनुभव की जाती है

Publisher: A REBEL BOOK

Language : HINDI

Binding: PAPER BACK

Pages : 235