“प्रीतम चाबी नैनन बसी” Osho की एक अत्यंत कोमल, प्रेममय और भक्ति–रस से ओतप्रोत कृति है, जिसमें वे प्रेम को साधना और साधना को प्रेम के रूप में उद्घाटित करते हैं। यह पुस्तक सूफ़ी, संत और भक्त कवियों की वाणी के माध्यम से प्रेम की उस गहराई तक ले जाती है जहाँ प्रेमी और प्रीतम के बीच का भेद मिट जाता है।
ओशो के अनुसार “प्रीतम” बाहर नहीं, भीतर बसता है—और “चाबी” जागरूकता, प्रेम और समर्पण की है। जब दृष्टि शुद्ध होती है, तब नैनों में ही ईश्वर का वास दिखाई देने लगता है। इस ग्रंथ में ओशो प्रेम को भावना नहीं, चेतना की अवस्था बताते हैं—जहाँ अहंकार पिघलता है और भक्ति सहज हो जाती है।
काव्यात्मक भाषा, गहरे प्रतीक और ध्यानात्मक व्याख्या के साथ यह पुस्तक पाठक को प्रेम, भक्ति और आत्मबोध की अंतर्यात्रा पर ले जाती है। जो पाठक भक्ति को रस, आनंद और अंतरंगता के रूप में अनुभव करना चाहते हैं—उनके लिए यह कृति एक मधुर, परिवर्तनकारी अनुभव है।
Publisher: A REBEL BOOK
Language : HINDI
Binding: HARD COVER
Pages : 464

