“प्रार्थना के बीज” ओशो की एक गहन आध्यात्मिक कृति है, जो प्रार्थना को शब्दों, कर्मकांडों या धार्मिक सीमाओं से परे ले जाकर उसे एक जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत करती है। ओशो बताते हैं कि सच्ची प्रार्थना मांगना नहीं, बल्कि कृतज्ञता और समर्पण की अवस्था है।
इस पुस्तक में वे समझाते हैं कि जब मन शांत होता है, हृदय विनम्र होता है और अहंकार पिघल जाता है—तभी भीतर प्रार्थना का बीज अंकुरित होता है। यह पुस्तक प्रार्थना, ध्यान, प्रेम, समर्पण और चेतना के विस्तार की गहराई में उतरती है। ओशो की दृष्टि में प्रार्थना कोई अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संवेदनशील अवस्था है।
आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और मानसिक उलझनों के बीच यह पुस्तक हमें भीतर की शांति, मौन और आत्मिक संतुलन से जोड़ती है। जो पाठक ध्यान, आध्यात्मिक अनुभव और हृदय की जागृति की तलाश में हैं, उनके लिए यह एक अमूल्य मार्गदर्शक है।
यह पुस्तक बताती है कि जब प्रार्थना का बीज भीतर बोया जाता है, तो जीवन स्वयं एक उत्सव बन जाता है।
Publisher: DIAMOND BOOKS
Language : English
Binding: PAPER BACK
Pages: 160

