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“प्रेम योग” Osho की एक गहरी, आत्मीय और रूपांतरणकारी कृति है, जिसमें वे प्रेम को भावना या संबंध से परे ले जाकर चेतना की जागृत अवस्था—योग के रूप में प्रस्तुत करते हैं। ओशो स्पष्ट करते हैं कि प्रेम केवल दो व्यक्तियों के बीच का अनुभव नहीं, बल्कि अपने भीतर के मौन, साक्षीभाव और स्वीकृति से जन्म लेने वाली ऊर्जा है।
यह पुस्तक प्रेम को स्वामित्व, अपेक्षा और निर्भरता से मुक्त करते हुए दिखाती है कि सच्चा प्रेम कैसा होता है—जहाँ न बंधन है, न भय, और न ही कोई शर्त। ओशो कहते हैं कि प्रेम का फूल तभी खिलता है जब साधक पहले स्वयं को जाने, स्वयं को स्वीकार करे, और भीतर की रोशनी को पहचाने।
“प्रेम योग” पाठक को यह समझ में लाने की प्रेरणा देता है कि प्रेम पाने से पहले प्रेम बनना पड़ता है। यह कृति रिश्तों की उलझनों को मोड़ नहीं, बल्कि स्वयं की जागरूकता के प्रकाश में पिघलाने का रास्ता दिखाती है। जो पाठक प्रेम को बोझ नहीं, आनंद और स्वतंत्रता की तरह जीना चाहते हैं—उनके लिए यह पुस्तक जीवन और प्रेम दोनों का नया द्वार खोलती है।

Publisher: DIVYANSH PUBLICATIONS

Language : HINDI

Binding: HARD COVER

Pages : 304