“रसीदी टिकट: बाहर की घटनाएँ, अंदर के अनुभव” अमृता प्रीतम की आत्मा से निकला हुआ वह साहित्यिक दस्तावेज़ है, जो सिर्फ एक आत्मकथा नहीं—एक स्त्री, एक लेखिका, एक प्रेमी, और एक संवेदनशील मनुष्य की अनकही भावनाओं की यात्रा है। यह पुस्तक अमृता प्रीतम के जीवन में आए उतार-चढ़ाव, प्रेम, पीड़ा, संघर्ष, सामाजिक परिस्थितियों और भीतर की मनोव्यथा को उतनी ही ईमानदारी से उजागर करती है जितनी बेबाकी से वह लिखती हैं।
इस आत्मकथात्मक रचना में अमृता पाठक को अपने बेहद निजी संसार में ले जाती हैं—जहाँ उनकी लेखकीय संवेदनाएँ जन्म लेती हैं, जहाँ प्रेम रचना का रूप लेता है, जहाँ रिश्तों की जटिलताएँ मन को तोड़ती भी हैं और गढ़ती भी हैं। उनके जीवन की बाहरी घटनाओं के पीछे छिपी आंतरिक भावनाओं की गहराई, सृजन की पीड़ा, प्रेम की धड़कन और स्त्री की आत्मनिर्भर चेतना इस पुस्तक को कालजयी बनाती हैं।
यह कृति उन सभी पाठकों के लिए अनिवार्य है जो हिंदी साहित्य, आत्मकथाएँ, स्त्री-विमर्श, संवेदनशील लेखन और जीवन की सच्चाइयों को गहरे स्तर पर समझना चाहते हैं।
यह पुस्तक पढ़ना अमृता के हृदय की धड़कनों को महसूस करना है—सीधा, सच्चा, तीखा और अतुलनीय।
PUBLISHER:HINDI POCKET BOOKS
BINDING: PAPER BACK
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 160

