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“शिक्षा में क्रांति” ओशो की वह दूरदर्शी और विचारोत्तेजक कृति है, जिसमें वे शिक्षा को अंकों, अंकों और अंकों तक सीमित करने की पुरानी व्यवस्था को चुनौती देते हुए कहते हैं—“ज्ञान तभी सार्थक है जब वह चरित्र, रचनात्मकता और चेतना को जन्म दे।”
इस पुस्तक में ओशो बताते हैं कि आज की शिक्षा स्मृति बढ़ाती है, लेकिन बुद्धि को नहीं जगाती; जानकारी देती है, पर अंतर्दृष्टि नहीं देती; प्रतियोगिता सिखाती है, पर स्वयं को समझने की कला नहीं सिखाती।
ओशो के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य सामाजिक मशीनें बनाना नहीं, बल्कि स्वतंत्र, सजग, रचनात्मक और प्रेमपूर्ण मनुष्य तैयार करना है। वे कहते हैं कि असली शिक्षा वहीं से शुरू होती है, जहाँ डर खत्म होता है, जिज्ञासा जन्म लेती है, और खोज की आग भीतर जलती है।
“शिक्षा में क्रांति” उन सभी के लिए मार्गदर्शक है जो शिक्षा को बोझ नहीं, जीने की कला और जागरण की प्रक्रिया समझते हैं — शिक्षक, विद्यार्थी, माता-पिता और विचारशील पाठक सभी के लिए यह कृति नई दृष्टि का द्वार खोलती है।

Publisher: A REBEL BOOK

Language : HINDI

Binding: HARD COVER

Pages : 513