“श्री दुर्गा सप्तशती” (गीता प्रेस, गोरखपुर | कोड 2304) शक्ति-उपासना का अद्भुत और प्रामाणिक ग्रंथ है, जिसे देवी माहात्म्य भी कहा जाता है। यह ग्रंथ माँ दुर्गा की महिमा, लीलाओं और उनके द्वारा अधर्म के विनाश का भावपूर्ण वर्णन करता है।
इसमें महिषासुर, धूम्रलोचन, चण्ड–मुण्ड और शुम्भ–निशुम्भ जैसे महाबली असुरों के वध की कथाएँ, देवी के विभिन्न रूपों—महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती—की उपासना और मंत्रात्मक स्तुति का सुंदर समन्वय मिलता है।
गीता प्रेस की परंपरागत शुद्धता, स्पष्ट मुद्रण और विश्वसनीय पाठ इस संस्करण को नवरात्रि, अनुष्ठान, पाठ एवं नियमित अध्ययन के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं। जो भी भक्त शक्ति, साहस, संरक्षण और आध्यात्मिक ऊर्जा की कामना करता है—उसके लिए यह ग्रंथ जीवनभर का संबल है।
PUBLISHER: GEETA PRESS GORAKHPUR
BINDING: HARD COVER
LANGUAGE: HINDI SANSKRIT
PAGES: 304

