“तंत्र और अंतः शरीर – विज्ञान भैरव तंत्र (तृतीय खंड)” Osho द्वारा दिए गए उन गहन प्रवचनों का हिस्सा है, जिनमें वे विज्ञान भैरव तंत्र के रहस्यों और ध्यान–विधियों को शरीर, ऊर्जा और चेतना की सूक्ष्म परतों से जोड़कर खुलते हैं। इस भाग में ओशो बताते हैं कि मानव शरीर केवल भौतिक ढांचा नहीं—ऊर्जा, संवेदनशीलता और चेतना का जीवंत मंदिर है।
ओशो समझाते हैं कि तंत्र दमन का नहीं, स्वीकृति और जागरूकता का मार्ग है—जहाँ हर सांस, हर स्पर्श, हर संवेदना साधना का द्वार बन सकती है। तृतीय खंड में वे साधक को शरीर की गहराइयों में उतरने, ऊर्जा के सूक्ष्म प्रवाह को महसूस करने और अंतः शरीर के द्वार पर जागृति का अनुभव करने की विधियाँ सिखाते हैं।
यह पुस्तक तंत्र के भ्रमों को मिटाकर दिखाती है कि जब शरीर मौन होता है, तब चेतना बोलती है—और साधक “अंदर की आँख” से अस्तित्व के रहस्य को देख पाता है। जो लोग ध्यान को केवल तकनीक नहीं, जीवन की ऊर्जा को पहचानने का मार्ग मानते हैं—उनके लिए यह कृति एक परिवर्तनकारी अनुभव है।
Publisher: HINDI POCKETS BOOKS
Language : HINDI
Binding: PAPER BACK
Pages : 204

